शिक्षामित्रों का आज का ज्वलन्त मुद्दा यही है । क्या करे पीड़ित शिक्षामित्र ?

ज्वलंत मुद्दा नम्बर 01:- जैसा कि प्रदेश सरकार ने विगत चार वर्षों से 1.5 लाख पीड़ित शिक्षामित्रो को यह कहते हुए गुमराह करती रही कि इनके साथ सपा ने धोखा दिया है और हमने इनका मानदेय 3500/- से बढ़ाकर 10,000/- कर दिया है? यह कभी नहीं अनुभव किया और कहा कि इनके भविष्य के साथ वास्तव में बहुत बड़ा सरकार की गलत नीतियों के कारण धोखा हुआ है? पूर्व सरकार ने इनका भविष्य सुरक्षित कर दिया था लेकिन कानूनी खामियों के कारण कोर्ट से हार हुई है और हमें इनका भविष्य सुरक्षित करने लिए कोई वैधानिक मार्ग निकाल कर के इनका भविष्य सुरक्षित करना चाहिए?

मुद्दा नम्बर - 2:-  सभी संगठनों के शीर्ष नेताओं को अपना - अपना ईगो, आम पीड़ित शिक्षामित्रो के लिए परित्याग करके तुरंत एक अति महत्वपूर्ण बैठक लखनऊ में एक उपयुक्त स्थान पर बुलानी चाहिए और ऐसी योजना बनाई जानी चाहिए कि योगी सरकार पुन : 1.5 लाख पीड़ित शिक्षामित्रो का भविष्य सुरक्षित करने के लिए विवश हो जाए?*

मुद्दा नम्बर - 3:- यदि अब वर्तमान सरकार के गतिमान अन्तिम वर्ष में सभी शीर्ष संगठनों के नेताओं के साथ साथ सभी आम पीड़ित शिक्षामित्र को अपना भविष्य सुरक्षित करने हेतु वर्तमान सरकार को पुनः कुछ अच्छा सोचने के बाध्य नहीं कर पाये तो पुन : इनसे कुछ अच्छा करने की अपेक्षा भविष्य में कभी भी मत करना?




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