लखनऊ से बड़ी खबर
परिषदीय विद्यालयों में ग्रीष्मावकाश 15 जून को समाप्त होने वाला है, लेकिन शिक्षक संगठनों ने विद्यालयों को 1 जुलाई से खोलने की मांग की है। उनका कहना है कि इस बार बड़ी संख्या में शिक्षक जनगणना कार्य में लगे रहे, जिसके कारण उन्हें वास्तविक रूप से ग्रीष्मकालीन अवकाश का लाभ नहीं मिल सका।
आखिर क्या है शिक्षकों की मांग?
शिक्षक संगठनों का कहना है कि गर्मी की छुट्टियां केवल कागजों पर ही अवकाश रहीं। कई शिक्षक पूरे अवकाश के दौरान जनगणना और अन्य सरकारी कार्यों में व्यस्त रहे।
शिक्षकों का तर्क है कि:
- ग्रीष्मावकाश के दौरान भी उन्हें लगातार सरकारी कार्य करने पड़े।
- भीषण गर्मी में फील्ड ड्यूटी करना आसान नहीं था।
- परिवार के साथ समय बिताने और आराम करने का अवसर नहीं मिला।
- इसलिए विद्यालयों को 15 जून के बजाय 1 जुलाई से खोला जाए।
शिक्षकों की भावना को समझना जरूरी
एक शिक्षक होने के नाते यह बात आसानी से समझी जा सकती है कि पूरे साल पढ़ाई, प्रशासनिक कार्य और फिर छुट्टियों में भी सरकारी ड्यूटी निभाने के बाद कुछ दिनों के वास्तविक आराम की आवश्यकता होती है।
कई शिक्षकों का कहना है कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में योगदान देना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन इसके कारण यदि पूरा अवकाश ही समाप्त हो जाए तो अतिरिक्त राहत भी मिलनी चाहिए।
क्या सरकार इस मांग पर विचार करेगी?
फिलहाल यह केवल शिक्षक संगठनों की मांग है। सरकार या बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।
यदि भविष्य में इस संबंध में कोई निर्णय लिया जाता है तो उसका सीधा प्रभाव प्रदेश के लाखों छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों पर पड़ेगा।
महत्वपूर्ण बातें एक नजर में
✅ ग्रीष्मावकाश 15 जून को समाप्त हो रहा है।
✅ शिक्षक संगठनों ने 1 जुलाई से स्कूल खोलने की मांग की है।
✅ जनगणना कार्य में लगे रहने के कारण शिक्षकों को पूरा अवकाश नहीं मिल पाया।
✅ अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।
Go with Gopal की राय
शिक्षकों की यह मांग केवल छुट्टियां बढ़ाने की नहीं, बल्कि वास्तविक अवकाश के अधिकार से जुड़ा मुद्दा भी है। अब देखना होगा कि शासन और शिक्षा विभाग इस मांग पर क्या निर्णय लेते हैं।
आपकी क्या राय है? क्या स्कूल 1 जुलाई से खुलने चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
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